Friday, April 12

Jallianwala Bagh जलियांवाला बाग़




जलियांवाला बाग़: आज ही जनरल डायर ने लगाया था लाशों का ढेर

भारत के इतिहास में कुछ तारीख कभी नहीं भूली जा सकती हैं। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पर्व कर पंजाब में अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर द्वारा किए गए निहत्थे मासूमों के हत्याकांड से केवल ब्रिटिश औपनिवेशिक राज की बर्बरता का ही परिचय नहीं मिलता, बल्कि इसने भारत के इतिहास की धारा को ही बदल दिया।

आजादी के आंदोलन की सफलता और बढ़ता जन आक्रोश देख ब्रिटिश राज ने दमन का रास्ता अपनाया। वैसे भी 6 अप्रैल की हड़ताल की सफलता से पंजाब का प्रशासन बौखला गया। पंजाब के दो बड़े नेताओं, सत्यापाल और डॉ. किचलू को गिरफ्तार कर निर्वासित कर दिया गया, जिससे अमृतसर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था।
जैसे ही पंजाब प्रशासन को यह खबर मिली कि 13 अप्रैल को बैसाखी के दिन आंदोलनकारी जलियांवाला बाग में जमा हो रहे हैं, तो प्रशासन ने उन्हें सबक सिखाने की ठान ली। एक दिन पहले ही मार्शल लॉ की घोषणा हो चुकी थी।
पंजाब के प्रशासक ने अतिरिक्त सैनिक टुकड़ी बुलवा ली थी। ब्रिगेडियर जनरल डायर के कमान में यह टुकड़ी 11 अप्रैल की रात को अमृतसर पहुंची और अगले दिन शहर में फ्लैग मार्च भी निकाला गया।

आन्दोलनकारियों के पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैसाखी के दिन 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे। हालांकि शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी इसमें सैंकड़ों लोग ऐसे भी थे, जो आस-पास के इलाकों से बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए थे और सभा की खबर सुन कर वहां जा पहुंचे थे।

सभा के शुरू होने तक वहां 10-15 हजार लोग जमा हो गए थे। तभी इस बाग के एकमात्र रास्ते से डायर ने अपनी सैनिक टुकड़ी के साथ वहां पोजिशन ली और बिना किसी चेतावनी गोलीबारी शुरू कर दी। जलियांवाला बाग में जमा लोगों की भीड़ पर कुल 1,650 राउंड गोलियां चलीं जिसमें सैंकड़ो अहिंसक सत्याग्रही शहीद हो गए, और हजारों घायल हुए। घबराहट में कई लोग बाग में बने कुंए में कूद पड़े। कुछ ही देर में जलियांवाला बाग में बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों की लाशों का ढेर लग गया था। अनाधिकृत आंकड़े के अनुसार यहा 1000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। इस बर्बरता ने भारत में ब्रिटिश राज की नींव हिला दी।
मुख्यालय वापस पहुंच कर डायर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया कि उस पर भारतीयों की एक फ़ौज ने हमला किया था जिससे बचने के लिए उसको गोलियां चलानी पड़ी। ब्रिटिश लेफ्टिनेंट गवर्नर मायकल ओ डायर ने उसके निर्णय को अनुमोदित कर दिया। इसके बाद गवर्नर मायकल ओ डायर ने अमृतसर और अन्य क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगा दिया। इस हत्याकाण्ड की विश्वव्यापी निंदा हुई जिसके दबाव में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एडविन मॉंटेग्यु ने 1919 के अंत में इसकी जांच के लिए हंटर कमीशन नियुक्त किया। कमीशन के सामने ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने स्वीकार किया कि वह गोली चलाने का निर्णय पहले से ही ले चुका था और वह उन लोगों पर चलाने के लिए दो तोपें भी ले गया था जो कि उस संकरे रास्ते से नहीं जा पाई थीं।

हंटर कमीशन की रिपोर्ट आने पर 1920 में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर को पदावनत कर कर्नल बना दिया गया और उसे भारत में पोस्ट न देने का निर्णय लिया गया। भारत में डायर के खिलाफ बढ़ते गुस्से के चलते उसे स्वास्थ्य कारणों के आधार पर ब्रिटेन वापस भेज दिया गया। ब्रिटेन में हाउस ऑफ कॉमन्स ने डायर का निंदा प्रस्ताव पारित किया परंतु हाउस ऑफ लॉर्ड ने इस हत्याकांड की प्रशंसा करते हुए उसका प्रशस्ति प्रस्ताव पारित किया। विश्वव्यापी निंदा के दबाव में बाद को ब्रिटिश सरकार को उसका निंदा प्रस्ताव पारित करना पड़ा और 1920 में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर को इस्तीफा देना पड़ा।


On Sunday, 13 April 1919, Dyer was convinced of a major insurrection and thus he banned all meetings. On hearing that a meeting of 15,000 to 20,000 people including women, children and the elderly had assembled at Jallianwala Bagh, Dyer went with fifty riflemen to a raised bank and ordered them to shoot at the crowd. Dyer continued the firing for about ten minutes, until the ammunition supply was almost exhausted; Dyer stated that 1,650 rounds had been fired, a number which seems to have been derived by counting empty cartridge cases picked up by the troops. Official British Indian sources gave a figure of 379 identified dead, with approximately 1,100 wounded. The casualty number estimated by the Indian National Congress was more than 1,500, with approximately 1,000 dead.

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IIM Lucknow drops fees by 10% from Rs 12 lakh to Rs 10.8 lakh


Premier management institute IIM Lucknow (IIM-L) has decided to reduce fees to Rs 10.8 lakh from Rs 12 lakh for the batch of 2013-2015, even as the older, more established IIM Ahmedabad and IIM Bangalore have increased fees for the period. 

"In today's environment when education is becoming costlier, IIM Lucknow would like to take a lead. This decision of ours would not only help many needy students to undertake education at institutions like ours, but it will also widen the area of selection amongst eligible students for undertaking education in IIM's", said JJ Irani, chairman, IIM Lucknow board of governors, in a press statement.

The new fees will be applicable to both the post-graduate MBA and post graduate programme in agri-business management. The duration of both the courses is two years.


M B A - Maths By Amiya: Hope other B-Schools follow the same trend

Courtesy : ET
http://economictimes.indiatimes.com/news/news-by-industry/services/education/iim-lucknow-drops-fees-by-10-from-rs-12-lakh-to-rs-10-8-lakh/articleshow/19511059.cms

For the first time, all women bench in Supreme Court today


For the first time in the history of the Supreme Court, an all women bench will hear cases in the top court today.

Justice Gyan Sudha Misra will head the women bench with her colleague Justice Ranjana Prakash Desai.

The women bench will hear cases at court No 4 in the top court.

The Supreme Court has two women judges.

Courtesy : NDTV
http://www.ndtv.com/article/india/for-the-first-time-all-women-bench-in-supreme-court-today-353077?fb